एक घने जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे। खरगोश अपनी तेज़ चाल पर बहुत घमंड करता था और हमेशा दूसरे जानवरों को छोटा दिखाने की कोशिश करता था। एक दिन उसने कछुए की धीमी चाल देखकर उसका मज़ाक उड़ाया और कहा, "तुम तो इतने धीरे चलते हो, मुझसे कभी नहीं जीत सकते।" कछुए को यह बात बुरी लगी और उसने खरगोश को दौड़ की चुनौती दे दी। जंगल के सारे जानवर यह दौड़ देखने के लिए इकट्ठा हो गए। लोमड़ी को दौड़ का न्यायाधीश बनाया गया और दौड़ शुरू हुई। जैसे ही सीटी बजी, खरगोश तेज़ी से दौड़ते हुए बहुत आगे निकल गया, जबकि कछुआ अपनी धीमी पर स्थिर चाल से चलता रहा। कुछ देर बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो कछुआ कहीं नज़र नहीं आया। उसे अपनी जीत का पूरा भरोसा हो गया, इसलिए वह एक छायादार पेड़ के नीचे आराम करने के लिए लेट गया और जल्दी ही गहरी नींद में सो गया। इधर कछुआ बिना रुके, बिना थके लगातार चलता रहा। जब खरगोश की नींद खुली, तब तक शाम हो चुकी थी और वह घबराकर दौड़ पड़ा। लेकिन जब वह अंतिम रेखा पर पहुँचा, तब तक कछुआ पहले ही वहाँ पहुँचकर दौड़ जीत चुका था।
1
अनुच्छेद पढ़कर इन प्रश्नों के उत्तर दो।
Answer it!
1.क्या तुम्हें लगता है खरगोश ने सोकर गलती की? क्यों?
2.खरगोश को अपनी किस बात पर घमंड था?
3.खरगोश को कैसा लगा होगा जब उसने देखा कि कछुआ जीत गया? अपने शब्दों में बताओ।
4.अगर तुम खरगोश की जगह होते तो क्या करते?
5.यह कहानी हमें क्या सीख देती है?
2
सही के सामने सही और गलत के सामने गलत का निशान लगाओ।
सही या गलत!
कछुआ खरगोश से तेज़ दौड़ता था।
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खरगोश ने कछुए को कमज़ोर समझकर गलती की।
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खरगोश दौड़ के दौरान बिल्कुल नहीं रुका।
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खरगोश ने कभी आराम नहीं किया और लगातार दौड़ता रहा।
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यह कहानी सिखाती है कि जल्दबाज़ी और घमंड नुकसान पहुँचा सकते हैं।